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साकी और शराब दर्द शायरी इन हिंदी इमेजेज डाउनलोड

साकी और शराब दर्द शायरी इन हिंदी इमेजेज डाउनलोड

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#मीलों का सफर पल में बर्बाद कर गया,
उसका ये कहना, कहो कैसे आना हुआ।
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मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुयी दहलीज़ पर मैं;
कौन आयेगा यहाँ कौन है आनेवाला!
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लौटा जो सज़ा काट के, वो बिना ज़ुर्म की;
घर आ के उसने, सारे परिंदे रिहा कर दिए!
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आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद;
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता!
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अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख,
इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी है!
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झट से बदल दूं, इतनी न हैसियत न आदत है मेरी;
रिश्ते हों या लिबास, मैं बरसों चलाता हूँ!
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सब फूल लेकर गए मैं कांटे ही उठा लाया;
पड़े रहते तो किसी अपने के पाँव मे जख्म दे
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तुम साथ नहीं हो लेकिन हमसे रूठ गये हो;
तुम जिन्दगी की राह में हमसे छूट गये हो;
बढ़ती ही जा रही हैं अपनी दूरियाँ दिल की;
तुम हाथ की लकीरों में हमसे टूट गये हो!
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सादगी तो देखो उन नज़रो की;
हमसे बचने की कोशिष में बार बार हमें ही देखती है!
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चिलमन का उलट जाना ज़ाहिर का बहाना है;
उनको तो बहर-सूरत इक जलवा दिख़ाना है!
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वज़ाहत इसकी पूछोगे तो फिर लाज़िम है उलझोगे;
ये अक्सर बे-वजह होता है जिसको इश्क़ कहते हैं!
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इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं,
गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं,
हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत,
हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं
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फिर निगाहों में धूल उड़ती है;
अक्स फिर आइने बदलने लगे!
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जो ज़रा किसी ने छेड़ा छलक पड़ेंगे आँसू;
कोई मुझ से यूँ न पूछे तेरा दिल उदास क्यों है!
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हम भी मजबूरियों का उज़्र करें;
फिर कहीं और मुब्तला हो जाएँ!
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खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नही;
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।
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हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;
अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!
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क्यों मुझसे तुम दूर-दूर सा रहते हो;
अपने हुस्न पर मगरूर सा रहते हो;
प्यार की कसमों के राजदार थे कभी;
अब बेवफा बनकर हुजूर सा रहते हो!
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कर दो तब्दील अदालतों को मय खानों में;
सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
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